श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! एक दिनकी बात है, द्वारकापुरीमें किसी ब्राह्मणीके गर्भसे एक पुत्र पैदा हुआ, परन्तु वह उसी समय पृथ्वीका स्पर्श होते ही मर गया॥ २२॥✎ 897
एकदा द्वारवत्यां तु विप्रपत्न्याः कुमारकः।
जातमात्रो भुवं स्पृष्ट्वा ममार किल भारत॥ २२
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! एक दिनकी बात है, द्वारकापुरीमें किसी ब्राह्मणीके गर्भसे एक पुत्र पैदा हुआ, परन्तु वह उसी समय पृथ्वीका स्पर्श होते ही मर गया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 695) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)