॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.89.14
पुनश्च सत्रमाव्रज्य मुनीनां ब्रह्मवादिनाम्।
स्वानुभूतमशेषेण राजन् भृगुरवर्णयत्॥ १४
punaśca satramāvrajya munīnāṃ brahmavādinām|
svānubhūtamaśeṣeṇa rājan bhṛguravarṇayat|| 14
अर्थ
परीक्षित्! भृगुजी वहाँसे लौटकर ब्रह्मवादी मुनियोंके सत्संगमें आये और उन्हें ब्रह्मा, शिव और विष्णुभगवान्के यहाँ जो कुछ अनुभव हुआ था, वह सब कह सुनाया॥ १४॥