श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

अथैकोननवतितमोऽध्यायः

भृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्‌का मरे हुए
ब्राह्मण-बालकोंको वापस लाना

श्रीशुक उवाच

सरस्वत्यास्तटे राजन्‍नृषयः सत्रमासत।

वितर्कः समभूत्तेषां त्रिष्वधीशेषु को महान्॥ १

sarasvatyāstaṭe rājannṛṣayaḥ satramāsata|

vitarkaḥ samabhūtteṣāṃ triṣvadhīśeṣu ko mahān|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! एक बार सरस्वती नदीके पावन तटपर यज्ञ प्रारम्भ करनेके लिये बड़े-बड़े ऋषि-मुनि एकत्र होकर बैठे। उन लोगोंमें इस विषयपर वाद-विवाद चला कि ब्रह्मा, शिव और विष्णुमें सबसे बड़ा कौन है?॥ १॥

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