॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.88.22
तच्छ्रुत्वा भगवान् रुद्रो दुर्मना इव भारत।
ओमिति प्रहसंस्तस्मै ददेऽहेरमृतं यथा॥ २२
tacchrutvā bhagavān rudro durmanā iva bhārata|
omiti prahasaṃstasmai dade'heramṛtaṃ yathā|| 22
अर्थ
परीक्षित्! उसकी यह याचना सुनकर भगवान् रुद्र पहले तो कुछ अनमने-से हो गये, फिर हँसकर कह दिया—‘अच्छा, ऐसा ही हो।’ ऐसा वर देकर उन्होंने मानो साँपको अमृत पिला दिया॥ २२॥