श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

शापप्रसादयोरीशा ब्रह्मविष्णुशिवादयः।

सद्यःशापप्रसादोऽङ्ग शिवो ब्रह्मा न चाच्युतः॥ १२

śāpaprasādayorīśā brahmaviṣṇuśivādayaḥ|

sadyaḥśāpaprasādo'ṅga śivo brahmā na cācyutaḥ|| 12

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, विष्णु और महादेव—ये तीनों शाप और वरदान देनेमें समर्थ हैं; परन्तु इनमें महादेव और ब्रह्मा शीघ्र ही प्रसन्‍न या रुष्ट होकर वरदान अथवा शाप दे देते हैं। परन्तु विष्णु भगवान् वैसे नहीं हैं॥ १२॥

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