sadyaḥśāpaprasādo'ṅga śivo brahmā na cācyutaḥ|| 12
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, विष्णु और महादेव—ये तीनों शाप और वरदान देनेमें समर्थ हैं; परन्तु इनमें महादेव और ब्रह्मा शीघ्र ही प्रसन्न या रुष्ट होकर वरदान अथवा शाप दे देते हैं। परन्तु विष्णु भगवान् वैसे नहीं हैं॥ १२॥
शापप्रसादयोरीशा ब्रह्मविष्णुशिवादयः।
सद्यःशापप्रसादोऽङ्ग शिवो ब्रह्मा न चाच्युतः॥ १२
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, विष्णु और महादेव—ये तीनों शाप और वरदान देनेमें समर्थ हैं; परन्तु इनमें महादेव और ब्रह्मा शीघ्र ही प्रसन्न या रुष्ट होकर वरदान अथवा शाप दे देते हैं। परन्तु विष्णु भगवान् वैसे नहीं हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 689) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/12/