भगवान् नारायणने ऋषियोंकी उस भरी सभामें नारदजीको उनके प्रश्नका उत्तर दिया और वह कथा सुनायी, जो पूर्वकालीन जनलोकनिवासियोंमें परस्पर वेदोंके तात्पर्य और ब्रह्मके स्वरूपके सम्बन्धमें विचार करते समय कही गयी थी॥ ८॥
तस्मै ह्यवोचद् भगवानृषीणां शृण्वतामिदम्।
यो ब्रह्मवादः पूर्वेषां जनलोकनिवासिनाम्॥ ८
भगवान् नारायणने ऋषियोंकी उस भरी सभामें नारदजीको उनके प्रश्नका उत्तर दिया और वह कथा सुनायी, जो पूर्वकालीन जनलोकनिवासियोंमें परस्पर वेदोंके तात्पर्य और ब्रह्मके स्वरूपके सम्बन्धमें विचार करते समय कही गयी थी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.87.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 669) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/87/8/