श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

तदम्भसा महाभाग आत्मानं सगृहान्वयम्।

स्नापयांचक्र उद्धर्षो लब्धसर्वमनोरथः॥ ४०

tadambhasā mahābhāga ātmānaṃ sagṛhānvayam|

snāpayāṃcakra uddharṣo labdhasarvamanorathaḥ|| 40

अर्थ

परीक्षित्! महान् सौभाग्यशाली श्रुतदेवने भगवान् और ऋषियोंके चरणोदकसे अपने घर और कुटुम्बियोंको सींच दिया। इस समय उनके सारे मनोरथ पूर्ण हो गये थे। वे हर्षातिरेकसे मतवाले हो रहे थे॥ ४०॥

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