॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.86.12
प्राहिणोत् पारिबर्हाणि वरवध्वोर्मुदा बलः।
महाधनोपस्करेभरथाश्वनरयोषितः ॥ १२
prāhiṇot pāribarhāṇi varavadhvormudā balaḥ|
mahādhanopaskarebharathāśvanarayoṣitaḥ || 12
अर्थ
इसके बाद बलरामजीने प्रसन्न होकर वर-वधूके लिये बहुत-सा धन, सामग्री, हाथी, रथ, घोड़े और दासी-दास दहेजमें भेजे॥ १२॥