श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

अथ षडशीतितमोऽध्यायः

सुभद्राहरण और भगवान्‌का मिथिलापुरीमें राजा जनक और
श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना

राजोवाच

ब्रह्मन् वेदितुमिच्छामः स्वसारं रामकृष्णयोः।

यथोपयेमे विजयो या ममासीत् पितामही॥ १

brahman veditumicchāmaḥ svasāraṃ rāmakṛṣṇayoḥ|

yathopayeme vijayo yā mamāsīt pitāmahī|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! मेरे दादा अर्जुनने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीकी बहिन सुभद्राजीसे, जो मेरी दादी थीं, किस प्रकार विवाह किया? मैं यह जाननेके लिये बहुत उत्सुक हूँ॥ १॥

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