॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.85.28
कृष्णरामौ समाश्राव्य पुत्रान् कंसविहिंसितान्।
स्मरन्ती कृपणं प्राह वैक्लव्यादश्रुलोचना॥ २८
kṛṣṇarāmau samāśrāvya putrān kaṃsavihiṃsitān|
smarantī kṛpaṇaṃ prāha vaiklavyādaśrulocanā|| 28
अर्थ
अब उन्हें अपने उन पुत्रोंकी याद आ गयी, जिन्हें कंसने मार डाला था। उनके स्मरणसे देवकीजीका हृदय आतुर हो गया, नेत्रोंसे आँसू बहने लगे। उन्होंने बड़े ही करुणस्वरसे श्रीकृष्ण और बलरामजीको सम्बोधित करके कहा॥ २८॥