॥ श्रीहरिः ॥
दिवि दुन्दुभयो नेदुर्जयशब्दयुता भुवि।
देवाश्च कुसुमासारान् मुमुचुर्हर्षविह्वलाः॥ २७
divi dundubhayo nedurjayaśabdayutā bhuvi|
devāśca kusumāsārān mumucurharṣavihvalāḥ|| 27
अर्थ
देवीजी! उस समय पृथ्वीमें जय-जयकार होने लगा और आकाशमें दुन्दुभियाँ बजने लगीं। बड़े-बड़े देवता आनन्द-विह्वल होकर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ २७॥
दिवि दुन्दुभयो नेदुर्जयशब्दयुता भुवि।
देवाश्च कुसुमासारान् मुमुचुर्हर्षविह्वलाः॥ २७
देवीजी! उस समय पृथ्वीमें जय-जयकार होने लगा और आकाशमें दुन्दुभियाँ बजने लगीं। बड़े-बड़े देवता आनन्द-विह्वल होकर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 641) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/83/27/