श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

अध्यात्मशिक्षया गोप्य एवं कृष्णेन शिक्षिताः।

तदनुस्मरणध्वस्तजीवकोशास्तमध्यगन् ॥ ४८

adhyātmaśikṣayā gopya evaṃ kṛṣṇena śikṣitāḥ|

tadanusmaraṇadhvastajīvakośāstamadhyagan || 48

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार गोपियोंको अध्यात्मज्ञानकी शिक्षासे शिक्षित किया। उसी उपदेशके बार-बार स्मरणसे गोपियोंका जीवकोश—लिंगशरीर नष्ट हो गया और वे भगवान्‌से एक हो गयीं, भगवान्‌को ही सदा-सर्वदाके लिये प्राप्त हो गयीं॥ ४८॥✎ 894

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #894 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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