श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

अपि नः स्मर्यते ब्रह्मन् वृत्तं निवसतां गुरौ।

गुरुदारैश्‍चोदितानामिन्धनानयने क्‍वचित्॥ ३५

api naḥ smaryate brahman vṛttaṃ nivasatāṃ gurau|

gurudāraiścoditānāmindhanānayane kvacit|| 35

अर्थ

ब्रह्मन्! जिस समय हमलोग गुरुकुलमें निवास कर रहे थे; उस समयकी वह बात आपको याद है क्या, जब हम दोनोंको एक दिन हमारी गुरुपत्‍नीने ईंधन लानेके लिये जंगलमें भेजा था॥ ३५॥

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