yaśodā ca mahābhāgā papau yasyāḥ stanaṃ hariḥ|| 46
अर्थ
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! नन्दबाबाने ऐसा कौन-सा बहुत बड़ा मंगलमय साधन किया था? और परमभाग्यवती यशोदाजीने भी ऐसी कौन-सी तपस्या की थी, जिसके कारण स्वयं भगवान्ने अपने श्रीमुखसे उनका स्तनपान किया॥ ४६॥
नन्दः किमकरोद् ब्रह्मन् श्रेय एवं महोदयम्।
यशोदा च महाभागा पपौ यस्याः स्तनं हरिः॥ ४६
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! नन्दबाबाने ऐसा कौन-सा बहुत बड़ा मंगलमय साधन किया था? और परमभाग्यवती यशोदाजीने भी ऐसी कौन-सी तपस्या की थी, जिसके कारण स्वयं भगवान्ने अपने श्रीमुखसे उनका स्तनपान किया॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.8.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 180) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/8/46/