दन्तवक्त्रके भाईका नाम था विदूरथ। वह अपने भाईकी मृत्युसे अत्यन्त शोकाकुल हो गया। अब वह क्रोधके मारे लम्बी-लम्बी साँस लेता हुआ हाथमें ढाल-तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे आया॥ ११॥
विदूरथस्तु तद्भ्राता भ्रातृशोकपरिप्लुतः।
आगच्छदसिचर्मभ्यामुच्छ्वसंस्तज्जिघांसया॥ ११
दन्तवक्त्रके भाईका नाम था विदूरथ। वह अपने भाईकी मृत्युसे अत्यन्त शोकाकुल हो गया। अब वह क्रोधके मारे लम्बी-लम्बी साँस लेता हुआ हाथमें ढाल-तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे आया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 611) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/11/