वे मन-ही-मन कहने लगे कि ‘मैं पूज्य भाई बलरामजीके साथ यहाँ चला आया। अब शिशुपालके पक्षपाती क्षत्रिय अवश्य ही द्वारकापर आक्रमण कर रहे होंगे’॥ ८॥
आह चाहमिहायात आर्यमिश्राभिसंगतः।
राजन्याश्चैद्यपक्षीया नूनं हन्युः पुरीं मम॥ ८
वे मन-ही-मन कहने लगे कि ‘मैं पूज्य भाई बलरामजीके साथ यहाँ चला आया। अब शिशुपालके पक्षपाती क्षत्रिय अवश्य ही द्वारकापर आक्रमण कर रहे होंगे’॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 607) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/8/