इस प्रकार यदुवंशी और शाल्वके सैनिक एक-दूसरेपर प्रहार करते रहे। बड़ा ही घमासान और भयंकर युद्ध हुआ और वह लगातार सत्ताईस दिनोंतक चलता रहा॥ ५॥
एवं यदूनां शाल्वानां निघ्नतामितरेतरम्।
युद्धं त्रिणवरात्रं तदभूत्तुमुलमुल्बणम्॥ ५
इस प्रकार यदुवंशी और शाल्वके सैनिक एक-दूसरेपर प्रहार करते रहे। बड़ा ही घमासान और भयंकर युद्ध हुआ और वह लगातार सत्ताईस दिनोंतक चलता रहा॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 606) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/5/