श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

कथं राममसम्भ्रान्तं जित्वाजेयं सुरासुरैः।

शाल्वेनाल्पीयसा नीतः पिता मे बलवान् विधिः॥ २४

kathaṃ rāmamasambhrāntaṃ jitvājeyaṃ surāsuraiḥ|

śālvenālpīyasā nītaḥ pitā me balavān vidhiḥ|| 24

अर्थ

‘अहो! मेरे भाई बलरामजीको तो देवता अथवा असुर कोई नहीं जीत सकता। वे सदा-सर्वदा सावधान रहते हैं। शाल्वका बल-पौरुष तो अत्यन्त अल्प है। फिर भी इसने उन्हें कैसे जीत लिया और कैसे मेरे पिताजीको बाँधकर ले गया? सचमुच, प्रारब्ध बहुत बलवान् है’॥ २४॥

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