उस समय द्युमान् यादवसेनाको तहस-नहस कर रहा था। प्रद्युम्नजीने उसके पास पहुँचकर उसे ऐसा करनेसे रोक दिया और मुसकराकर आठ बाण मारे॥ २॥
विधमन्तं स्वसैन्यानि द्युमन्तं रुक्मिणीसुतः।
प्रतिहत्य प्रत्यविध्यन्नाराचैरष्टभिः स्मयन्॥ २
उस समय द्युमान् यादवसेनाको तहस-नहस कर रहा था। प्रद्युम्नजीने उसके पास पहुँचकर उसे ऐसा करनेसे रोक दिया और मुसकराकर आठ बाण मारे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 606) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/2/