श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

यत्त्वया मूढ नः सख्युर्भ्रातुर्भार्या हृतेक्षताम्।

प्रमत्तः स सभामध्ये त्वया व्यापादितः सखा॥ १७

yattvayā mūḍha naḥ sakhyurbhrāturbhāryā hṛtekṣatām|

pramattaḥ sa sabhāmadhye tvayā vyāpāditaḥ sakhā|| 17

अर्थ

‘मूढ़! तूने हमलोगोंके देखते-देखते हमारे भाई और सखा शिशुपालकी पत्‍नीको हर लिया तथा भरी सभामें, जब कि हमारा मित्र शिशुपाल असावधान था, तूने उसे मार डाला॥ १७॥

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