॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.76.9
निरुद्ध्य सेनया शाल्वो महत्या भरतर्षभ।
पुरीं बभंजोपवनान्युद्यानानि च सर्वशः॥ ९
niruddhya senayā śālvo mahatyā bharatarṣabha|
purīṃ babhaṃjopavanānyudyānāni ca sarvaśaḥ|| 9
अर्थ
परीक्षित्! शाल्वने अपनी बहुत बड़ी सेनासे द्वारकाको चारों ओरसे घेर लिया और फिर उसके फल-फूलसे लदे हुए उपवन और उद्यानोंको उजाड़ने और नगरद्वारों, फाटकों, राजमहलों, अटारियों, दीवारों और नागरिकोंके मनोविनोदके स्थानोंको नष्ट-भ्रष्ट करने लगा। उस श्रेष्ठ विमानसे शस्त्रोंकी झड़ी लग गयी॥ ९-१०॥