इस धर्मको समझते हुए ही मैंने आपको रणभूमिसे हटाया है। शत्रुने आपपर गदाका प्रहार किया था, जिससे आप मूर्च्छित हो गये थे, बड़े संकटमें थे; इसीसे मुझे ऐसा करना पड़ा॥ ३३॥
एतद् विदित्वा तु भवान् मयापोवाहितो रणात्।
उपसृष्टः परेणेति मूर्च्छितो गदया हतः॥ ३३
इस धर्मको समझते हुए ही मैंने आपको रणभूमिसे हटाया है। शत्रुने आपपर गदाका प्रहार किया था, जिससे आप मूर्च्छित हो गये थे, बड़े संकटमें थे; इसीसे मुझे ऐसा करना पड़ा॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 606) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/76/33/