परीक्षित्! गदाकी चोटसे शत्रुदमन प्रद्युम्नजीका वक्षःस्थल फट-सा गया। दारुकका पुत्र उनका रथ हाँक रहा था। वह सारथिधर्मके अनुसार उन्हें रणभूमिसे हटा ले गया॥ २७॥
प्रद्युम्नं गदया शीर्णवक्षःस्थलमरिन्दमम्।
अपोवाह रणात् सूतो धर्मविद् दारुकात्मजः॥ २७
परीक्षित्! गदाकी चोटसे शत्रुदमन प्रद्युम्नजीका वक्षःस्थल फट-सा गया। दारुकका पुत्र उनका रथ हाँक रहा था। वह सारथिधर्मके अनुसार उन्हें रणभूमिसे हटा ले गया॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 605) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/76/27/