॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.75.6
युयुधानो विकर्णश्च हार्दिक्यो विदुरादयः।
बाह्लीकपुत्रा भूर्याद्या ये च सन्तर्दनादयः॥ ६
yuyudhāno vikarṇaśca hārdikyo vidurādayaḥ|
bāhlīkaputrā bhūryādyā ye ca santardanādayaḥ|| 6
अर्थ
परीक्षित्! इसी प्रकार सात्यकि, विकर्ण, हार्दिक्य, विदुर, भूरिश्रवा आदि बाह्लीकके पुत्र और सन्तर्दन आदि राजसूय यज्ञमें विभिन्न कर्मोंमें नियुक्त थे। वे सब-के-सब वैसा ही काम करते थे, जिससे महाराज युधिष्ठिरका प्रिय और हित हो॥ ६-७॥✎ 1713