श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

एकदान्तःपुरे तस्य वीक्ष्य दुर्योधनः श्रियम्।

अतप्यद् राजसूयस्य महित्वं चाच्युतात्मनः॥ ३१

ekadāntaḥpure tasya vīkṣya duryodhanaḥ śriyam|

atapyad rājasūyasya mahitvaṃ cācyutātmanaḥ|| 31

अर्थ

एक दिनकी बात है, भगवान्‌के परमप्रेमी महाराज युधिष्ठिरके अन्तःपुरकी सौन्दर्य-सम्पत्ति और राजसूय यज्ञद्वारा प्राप्त महत्त्वको देखकर दुर्योधनका मन डाहसे जलने लगा॥ ३१॥

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