श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

चित्रध्वजपताकाग्रैरिभेन्द्रस्यन्दनार्वभिः ।

स्वलंकृतैर्भटैर्भूपा निर्ययू रुक्ममालिनः॥ ११

citradhvajapatākāgrairibhendrasyandanārvabhiḥ |

svalaṃkṛtairbhaṭairbhūpā niryayū rukmamālinaḥ|| 11

अर्थ

सोनेके हार पहने हुए यदु, सृंजय, कम्बोज, कुरु, केकय और कोसल देशके नरपति रंग-बिरंगी ध्वजा-पताकाओंसे युक्त और खूब सजे-धजे गजराजों, रथों, घोड़ों तथा सुसज्जित वीर सैनिकोंके साथ महाराज युधिष्ठिरको आगे करके पृथ्वीको कँपाते हुए चल रहे थे॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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