श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

ततोऽनुज्ञाप्य राजानमनिच्छन्तमपीश्‍वरः।

ययौ सभार्यः सामात्यः स्वपुरं देवकीसुतः॥ ४९

tato'nujñāpya rājānamanicchantamapīśvaraḥ|

yayau sabhāryaḥ sāmātyaḥ svapuraṃ devakīsutaḥ|| 49

अर्थ

इसके बाद राजा युधिष्ठिरकी इच्छा न होनेपर भी सर्व-शक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने उनसे अनुमति ले ली और अपनी रानियों तथा मन्त्रियोंके साथ इन्द्रप्रस्थसे द्वारकापुरीकी यात्रा की॥ ४९॥

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