श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

चैद्यदेहोत्थितं ज्योतिर्वासुदेवमुपाविशत्।

पश्यतां सर्वभूतानामुल्केव भुवि खाच्च्युता॥ ४५

caidyadehotthitaṃ jyotirvāsudevamupāviśat|

paśyatāṃ sarvabhūtānāmulkeva bhuvi khāccyutā|| 45

अर्थ

जैसे आकाशसे गिरा हुआ लूक धरतीमें समा जाता है, वैसे ही सब प्राणियोंके देखते-देखते शिशुपालके शरीरसे एक ज्योति निकलकर भगवान् श्रीकृष्णमें समा गयी॥ ४५॥

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