यज्ञकी भूल-चूक बतलानेवाले उन सदसस्पतियोंको छोड़कर यह कुलकलंक ग्वाला भला, अग्रपूजाका अधिकारी कैसे हो सकता है? क्या कौआ कभी यज्ञके पुरोडाशका अधिकारी हो सकता है?॥ ३४॥
सदस्पतीनतिक्रम्य गोपालः कुलपांसनः।
यथा काकः पुरोडाशं सपर्यां कथमर्हति॥ ३४
यज्ञकी भूल-चूक बतलानेवाले उन सदसस्पतियोंको छोड़कर यह कुलकलंक ग्वाला भला, अग्रपूजाका अधिकारी कैसे हो सकता है? क्या कौआ कभी यज्ञके पुरोडाशका अधिकारी हो सकता है?॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 595) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/74/34/