श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

सदस्पतीनतिक्रम्य गोपालः कुलपांसनः।

यथा काकः पुरोडाशं सपर्यां कथमर्हति॥ ३४

sadaspatīnatikramya gopālaḥ kulapāṃsanaḥ|

yathā kākaḥ puroḍāśaṃ saparyāṃ kathamarhati|| 34

अर्थ

यज्ञकी भूल-चूक बतलानेवाले उन सदसस्पतियोंको छोड़कर यह कुलकलंक ग्वाला भला, अग्रपूजाका अधिकारी कैसे हो सकता है? क्या कौआ कभी यज्ञके पुरोडाशका अधिकारी हो सकता है?॥ ३४॥

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