श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

यूयं पात्रविदां श्रेष्ठा मा मन्ध्वं बालभाषितम्।

सदसस्पतयः सर्वे कृष्णो यत् सम्मतोऽर्हणे॥ ३२

yūyaṃ pātravidāṃ śreṣṭhā mā mandhvaṃ bālabhāṣitam|

sadasaspatayaḥ sarve kṛṣṇo yat sammato'rhaṇe|| 32

अर्थ

पर मैं मानता हूँ कि आपलोग अग्रपूजाके योग्य पात्रका निर्णय करनेमें सर्वथा समर्थ हैं। इसलिये सदसस्पतियो! आपलोग बालक सहदेवकी यह बात ठीक न मानें कि ‘कृष्ण ही अग्रपूजाके योग्य हैं॥ ३२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें