श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

विजित्य नृपतीन् सर्वान् कृत्वा च जगतीं वशे।

सम्भृत्य सर्वसम्भारानाहरस्व महाक्रतुम्॥ ९

vijitya nṛpatīn sarvān kṛtvā ca jagatīṃ vaśe|

sambhṛtya sarvasambhārānāharasva mahākratum|| 9

अर्थ

महाराज! पृथ्वीके समस्त नरपतियोंको जीतकर, सारी पृथ्वीको अपने वशमें करके और यज्ञोचित सम्पूर्ण सामग्री एकत्रित करके फिर इस महायज्ञका अनुष्ठान कीजिये॥ ९॥

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