श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

एवमावेदितो राजा जहासोच्चैः स्म मागधः।

आह चामर्षितो मन्दा युद्धं तर्हि ददामि वः॥ ३०

evamāvedito rājā jahāsoccaiḥ sma māgadhaḥ|

āha cāmarṣito mandā yuddhaṃ tarhi dadāmi vaḥ|| 30

अर्थ

जब भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार अपना परिचय दिया, तब राजा जरासन्ध ठठाकर हँसने लगा। और चिढ़कर बोला—‘अरे मूर्खो! यदि तुम्हें युद्धकी ही इच्छा है तो लो मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करता हूँ॥ ३०॥

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