श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

निर्गमय्यावरोधान् स्वान् ससुतान् सपरिच्छदान्।

संकर्षणमनुज्ञाप्य यदुराजं च शत्रुहन्।

सूतोपनीतं स्वरथमारुहद् गरुडध्वजम्॥ १३

nirgamayyāvarodhān svān sasutān saparicchadān|

saṃkarṣaṇamanujñāpya yadurājaṃ ca śatruhan|

sūtopanītaṃ svarathamāruhad garuḍadhvajam|| 13

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने यदुराज उग्रसेन और बलरामजीसे आज्ञा लेकर बाल-बच्चोंके साथ रानियों और उनके सब सामानोंको आगे चला दिया और फिर दारुकके लाये हुए गरुड़ध्वज रथपर स्वयं सवार हुए॥ १३॥

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