इत्युपामन्त्रितो भर्त्रा सर्वज्ञेनापि मुग्धवत्।
निदेशं शिरसाऽऽधाय उद्धवः प्रत्यभाषत॥ ४७
जब उद्धवजीने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण सर्वज्ञ होनेपर भी अनजानकी तरह सलाह पूछ रहे हैं, तब वे उनकी आज्ञा शिरोधार्य करके बोले॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 573) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/70/47/