rājñaḥ paitṛṣvaseyasya bhaktasya ca cikīrṣitam|| 40
अर्थ
प्रभो! आप स्वयं परब्रह्म हैं, तथापि मनुष्योंकी-सी लीलाका नाट्य करते हुए मुझसे पूछ रहे हैं। इसलिये आपके फुफेरे भाई और प्रेमी भक्त राजा युधिष्ठिर क्या करना चाहते हैं, यह बात मैं आपको सुनाता हूँ॥ ४०॥✎ 2128
अथाप्याश्रावये ब्रह्म नरलोकविडम्बनम्।
राज्ञः पैतृष्वसेयस्य भक्तस्य च चिकीर्षितम्॥ ४०
प्रभो! आप स्वयं परब्रह्म हैं, तथापि मनुष्योंकी-सी लीलाका नाट्य करते हुए मुझसे पूछ रहे हैं। इसलिये आपके फुफेरे भाई और प्रेमी भक्त राजा युधिष्ठिर क्या करना चाहते हैं, यह बात मैं आपको सुनाता हूँ॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 572) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/70/40/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)