श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

न हि तेऽविदितं किंचिल्लोकेष्वीश्‍वरकर्तृषु।

अथ पृच्छामहे युष्मान् पाण्डवानां चिकीर्षितम्॥ ३६

na hi te'viditaṃ kiṃcillokeṣvīśvarakartṛṣu|

atha pṛcchāmahe yuṣmān pāṇḍavānāṃ cikīrṣitam|| 36

अर्थ

ईश्‍वरके द्वारा रचे हुए तीनों लोकोंमें ऐसी कोई बात नहीं है, जिसे आप न जानते हों। अतः हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि युधिष्ठिर आदि पाण्डव इस समय क्या करना चाहते हैं?’॥ ३६॥✎ 1708

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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