श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

सभाजयित्वा विधिवत् कृतासनपरिग्रहम्।

बभाषे सूनृतैर्वाक्यैः श्रद्धया तर्पयन् मुनिम्॥ ३४

sabhājayitvā vidhivat kṛtāsanaparigraham|

babhāṣe sūnṛtairvākyaiḥ śraddhayā tarpayan munim|| 34

अर्थ

जब देवर्षि नारद आसन स्वीकार करके बैठ गये, तब भगवान्‌ने उनकी विधिपूर्वक पूजा की और अपनी श्रद्धासे उनको सन्तुष्ट करते हुए वे मधुर वाणीसे बोले—॥ ३४॥✎ 1708

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1708 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: विधि-पूर्वक → विधिपूर्वक

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