श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

येऽसूयानृतदम्भेर्ष्याहिंसामानविवर्जिताः ।

न तेषां सत्यशीलानामाशिषो विफलाः कृताः॥ १३

ye'sūyānṛtadambherṣyāhiṃsāmānavivarjitāḥ |

na teṣāṃ satyaśīlānāmāśiṣo viphalāḥ kṛtāḥ|| 13

अर्थ

जो किसीके गुणोंमें दोष नहीं निकालते, झूठ नहीं बोलते, दम्भ, ईर्ष्या और हिंसा नहीं करते तथा अभिमानसे रहित हैं—उन सत्यशील ब्राह्मणोंका आशीर्वाद कभी विफल नहीं होता॥ १३॥

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