॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.7.13
येऽसूयानृतदम्भेर्ष्याहिंसामानविवर्जिताः ।
न तेषां सत्यशीलानामाशिषो विफलाः कृताः॥ १३
ye'sūyānṛtadambherṣyāhiṃsāmānavivarjitāḥ |
na teṣāṃ satyaśīlānāmāśiṣo viphalāḥ kṛtāḥ|| 13
अर्थ
जो किसीके गुणोंमें दोष नहीं निकालते, झूठ नहीं बोलते, दम्भ, ईर्ष्या और हिंसा नहीं करते तथा अभिमानसे रहित हैं—उन सत्यशील ब्राह्मणोंका आशीर्वाद कभी विफल नहीं होता॥ १३॥