श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

पूर्ववत् स्थापितं गोपैर्बलिभिः सपरिच्छदम्।

विप्रा हुत्वार्चयांचक्रुर्दध्यक्षतकुशाम्बुभिः॥ १२

pūrvavat sthāpitaṃ gopairbalibhiḥ saparicchadam|

viprā hutvārcayāṃcakrurdadhyakṣatakuśāmbubhiḥ|| 12

अर्थ

बलवान् गोपोंने छकड़ेको फिर सीधा कर दिया। उसपर पहलेकी तरह सारी सामग्री रख दी गयी। ब्राह्मणोंने हवन किया और दही, अक्षत, कुश तथा जलके द्वारा भगवान् और उस छकड़ेकी पूजा की॥ १२॥

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