निर्मल जलसे भरे सरोवरोंमें नीले, लाल और सफेद रंगके भाँति-भाँतिके कमल खिले हुए थे। कुमुद (कोईं) और नवजात कमलोंकी मानो भीड़ ही लगी हुई थी। उनमें हंस और सारस कलरव कर रहे थे॥ ४॥
उत्फुल्लेन्दीवराम्भोजकह्लारकुमुदोत्पलैः।
छुरितेषु सरस्सूच्चैः कूजितां हंससारसैः॥ ४
निर्मल जलसे भरे सरोवरोंमें नीले, लाल और सफेद रंगके भाँति-भाँतिके कमल खिले हुए थे। कुमुद (कोईं) और नवजात कमलोंकी मानो भीड़ ही लगी हुई थी। उनमें हंस और सारस कलरव कर रहे थे॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 560) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/4/