कहीं घरसे कन्याओंको विदा कर रहे हैं, तो कहीं बुलानेकी तैयारीमें लगे हुए हैं। योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णके इन विराट् उत्सवोंको देखकर सभी लोग विस्मित—चकित हो जाते थे॥ ३३॥
प्रस्थापनोपानयनैरपत्यानां महोत्सवान्।
वीक्ष्य योगेश्वरेशस्य येषां लोका विसिस्मिरे॥ ३३
कहीं घरसे कन्याओंको विदा कर रहे हैं, तो कहीं बुलानेकी तैयारीमें लगे हुए हैं। योगेश्वरेश्वर भगवान् श्रीकृष्णके इन विराट् उत्सवोंको देखकर सभी लोग विस्मित—चकित हो जाते थे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 564) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/33/