श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

कुत्रचिद् द्विजमुख्येभ्यो ददतं गाः स्वलंकृताः।

इतिहासपुराणानि शृण्वन्तं मंगलानि च॥ २८

kutracid dvijamukhyebhyo dadataṃ gāḥ svalaṃkṛtāḥ|

itihāsapurāṇāni śṛṇvantaṃ maṃgalāni ca|| 28

अर्थ

कहीं श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको वस्त्राभूषणसे सुसज्जित गौओंका दान कर रहे हैं, तो कहीं मंगलमय इतिहास-पुराणोंका श्रवण कर रहे हैं॥ २८॥✎ 1705

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1705 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: यज्ञ-कुण्डोंमें → यज्ञकुण्डोंमें

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