कहीं श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको वस्त्राभूषणसे सुसज्जित गौओंका दान कर रहे हैं, तो कहीं मंगलमय इतिहास-पुराणोंका श्रवण कर रहे हैं॥ २८॥✎ 1705
कुत्रचिद् द्विजमुख्येभ्यो ददतं गाः स्वलंकृताः।
इतिहासपुराणानि शृण्वन्तं मंगलानि च॥ २८
कहीं श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको वस्त्राभूषणसे सुसज्जित गौओंका दान कर रहे हैं, तो कहीं मंगलमय इतिहास-पुराणोंका श्रवण कर रहे हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 564) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)