श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

देवर्षि नारदजीका भगवान्‌की गृहचर्या देखना

श्रीशुक उवाच

नरकं निहतं श्रुत्वा तथोद्वाहं च योषिताम्।

कृष्णेनैकेन बह्वीनां तद् दिदृक्षुः स्म नारदः॥ १

narakaṃ nihataṃ śrutvā tathodvāhaṃ ca yoṣitām|

kṛṣṇenaikena bahvīnāṃ tad didṛkṣuḥ sma nāradaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब देवर्षि नारदने सुना कि भगवान् श्रीकृष्णने नरकासुर (भौमासुर) को मारकर अकेले ही हजारों राज-कुमारियोंके साथ विवाह कर लिया है, तब उनके मनमें भगवान्‌की रहन-सहन देखनेकी बड़ी अभिलाषा हुई॥ १॥

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