॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.68.40
अद्य निष्कौरवीं पृथ्वीं करिष्यामीत्यमर्षितः।
गृहीत्वा हलमुत्तस्थौ दहन्निव जगत्त्रयम्॥ ४०
adya niṣkauravīṃ pṛthvīṃ kariṣyāmītyamarṣitaḥ|
gṛhītvā halamuttasthau dahanniva jagattrayam|| 40
अर्थ
आज मैं सारी पृथ्वीको कौरवहीन कर डालूँगा, इस प्रकार कहते-कहते बलरामजी क्रोधसे ऐसे भर गये, मानो त्रिलोकीको भस्म कर देंगे। वे अपना हल लेकर खड़े हो गये॥ ४०॥