॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.68.32
अहो यदून् सुसंरब्धान् कृष्णं च कुपितं शनैः।
सान्त्वयित्वाहमेतेषां शममिच्छन्निहागतः॥ ३२
aho yadūn susaṃrabdhān kṛṣṇaṃ ca kupitaṃ śanaiḥ|
sāntvayitvāhameteṣāṃ śamamicchannihāgataḥ|| 32
अर्थ
भला, देखो तो सही—सारे यदुवंशी और श्रीकृष्ण भी क्रोधसे भरकर लड़ाईके लिये तैयार हो रहे थे। मैं उन्हें शनैः-शनैः समझा-बुझाकर इन लोगोंको शान्त करनेके लिये, सुलह करनेके लिये यहाँ आया॥ ३२॥