इससे कौरवोंको बड़ा क्रोध हुआ, वे बोले—‘यह बालक बहुत ढीठ है। देखो तो सही, इसने हमलोगोंको नीचा दिखाकर बलपूर्वक हमारी कन्याका अपहरण कर लिया। वह तो इसे चाहती भी न थी॥ २॥✎ 1701
कौरवाः कुपिता ऊचुर्दुर्विनीतोऽयमर्भकः।
कदर्थीकृत्य नः कन्यामकामामहरद् बलात्॥ २
इससे कौरवोंको बड़ा क्रोध हुआ, वे बोले—‘यह बालक बहुत ढीठ है। देखो तो सही, इसने हमलोगोंको नीचा दिखाकर बलपूर्वक हमारी कन्याका अपहरण कर लिया। वह तो इसे चाहती भी न थी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 554) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)