श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

कौरवाः कुपिता ऊचुर्दुर्विनीतोऽयमर्भकः।

कदर्थीकृत्य नः कन्यामकामामहरद् बलात्॥ २

kauravāḥ kupitā ūcurdurvinīto'yamarbhakaḥ|

kadarthīkṛtya naḥ kanyāmakāmāmaharad balāt|| 2

अर्थ

इससे कौरवोंको बड़ा क्रोध हुआ, वे बोले—‘यह बालक बहुत ढीठ है। देखो तो सही, इसने हमलोगोंको नीचा दिखाकर बलपूर्वक हमारी कन्याका अपहरण कर लिया। वह तो इसे चाहती भी न थी॥ २॥✎ 1701

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1701 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जाम्बवती-नन्दन → जाम्बवतीनन्दन

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