परीक्षित्! भगवान् सबके बाहर-भीतरकी जाननेवाले हैं। वे जान गये कि यह काशीसे चली हुई माहेश्वरी कृत्या है। उन्होंने उसके प्रतीकारके लिये अपने पास ही विराजमान चक्रसुदर्शनको आज्ञा दी॥ ३८॥
सर्वस्यान्तर्बहिःसाक्षी कृत्यां माहेश्वरीं विभुः।
विज्ञाय तद्विघातार्थं पार्श्वस्थं चक्रमादिशत्॥ ३८
परीक्षित्! भगवान् सबके बाहर-भीतरकी जाननेवाले हैं। वे जान गये कि यह काशीसे चली हुई माहेश्वरी कृत्या है। उन्होंने उसके प्रतीकारके लिये अपने पास ही विराजमान चक्रसुदर्शनको आज्ञा दी॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 550) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/66/38/