इसके बाद बड़े-बड़े गोपोंको बलरामजीने और छोटे-छोटे गोपोंने बलरामजीको नमस्कार किया। वे अपनी आयु, मेल-जोल और सम्बन्धके अनुसार सबसे मिले-जुले॥ ४॥✎ 1699
गोपवृद्धांश्च विधिवद् यविष्ठैरभिवन्दितः।
यथावयो यथासख्यं यथासम्बन्धमात्मनः॥ ४
इसके बाद बड़े-बड़े गोपोंको बलरामजीने और छोटे-छोटे गोपोंने बलरामजीको नमस्कार किया। वे अपनी आयु, मेल-जोल और सम्बन्धके अनुसार सबसे मिले-जुले॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 542) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)