श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

राम राम महाबाहो न जाने तव विक्रमम्।

यस्यैकांशेन विधृता जगती जगतः पते॥ २६

rāma rāma mahābāho na jāne tava vikramam|

yasyaikāṃśena vidhṛtā jagatī jagataḥ pate|| 26

अर्थ

‘लोकाभिराम बलरामजी! महाबाहो! मैं आपका पराक्रम भूल गयी थी। जगत्पते! अब मैं जान गयी कि आपके अंशमात्र शेषजी इस सारे जगत‍्को धारण करते हैं॥ २६॥

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