राजा नृगके चले जानेपर ब्राह्मणोंके परम प्रेमी, धर्मके आधार देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णने क्षत्रियोंको शिक्षा देनेके लिये वहाँ उपस्थित अपने कुटुम्बके लोगोंसे कहा—॥ ३१॥✎ 1698212421252126
कृष्णः परिजनं प्राह भगवान् देवकीसुतः।
ब्रह्मण्यदेवो धर्मात्मा राजन्याननुशिक्षयन्॥ ३१
राजा नृगके चले जानेपर ब्राह्मणोंके परम प्रेमी, धर्मके आधार देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णने क्षत्रियोंको शिक्षा देनेके लिये वहाँ उपस्थित अपने कुटुम्बके लोगोंसे कहा—॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.64.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 540) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/64/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)